ब्राउनटॉप मिलेट की खेती (Brown Top Millet Farming) – उन्नत तकनीक, संतुलित पोषण एवं अधिक उत्पादन
ब्राउनटॉप मिलेट (Brown Top Millet) श्री अन्न (Millets) की एक महत्वपूर्ण एवं तेजी से लोकप्रिय हो रही फसल है। इसका वैज्ञानिक नाम Urochloa ramosa (पूर्व नाम: Brachiaria ramosa) है। यह कम पानी, कम लागत तथा कमजोर भूमि में भी अच्छी पैदावार देने वाली फसल है। भारत में इसकी खेती कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान तथा उत्तर भारत के कई क्षेत्रों में शुरू हो चुकी है।
ब्राउनटॉप मिलेट में फाइबर, आयरन, कैल्शियम, प्रोटीन, मैग्नीशियम एवं एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता के कारण इसकी मांग लगातार बढ़ रही है। यदि किसान आधुनिक कृषि तकनीकों के साथ Sadaveer के जैविक उत्पादों का प्रयोग करें तो फसल की वृद्धि, बालियों का विकास एवं उत्पादन में उल्लेखनीय सुधार प्राप्त किया जा सकता है।
ब्राउनटॉप मिलेट का महत्व
- कम पानी में सफल खेती।
- सूखा सहन करने वाली फसल।
- कम लागत में अधिक लाभ।
- कम उपजाऊ भूमि में भी अच्छी पैदावार।
- पौष्टिक श्री अन्न (Nutri Cereal)।
- जैविक खेती के लिए उपयुक्त।
उपयुक्त जलवायु
20°C से 32°C तापमान इसके लिए उपयुक्त रहता है। यह कम वर्षा वाले क्षेत्रों में भी अच्छी तरह उगाई जा सकती है तथा सूखे की स्थिति में भी बेहतर प्रदर्शन करती है।
उपयुक्त भूमि
अच्छी जल निकासी वाली दोमट, बलुई दोमट एवं हल्की लाल मिट्टी इसकी खेती के लिए उपयुक्त रहती है। भूमि का pH 5.5 से 7.5 सर्वोत्तम माना जाता है।
खेत की तैयारी
2-3 जुताई करके खेत को भुरभुरा बना लें। अंतिम जुताई के समय 8-10 टन गोबर की अच्छी तरह सड़ी हुई खाद प्रति हेक्टेयर मिलाएं।
साडा वीर (Sada Veer)
बुवाई के समय साडा वीर का प्रयोग जड़ों के विकास, मिट्टी में पोषक तत्वों की उपलब्धता तथा पौधों की प्रारंभिक वृद्धि को बेहतर बनाने में सहायक होता है।
उन्नत किस्में
- ICTP-8203
- BBM-1
- Local Improved Lines
- State Recommended Brown Top Varieties
बुवाई का समय
- खरीफ: जून से जुलाई
- वर्षा आधारित क्षेत्रों में मानसून के साथ बुवाई करें।
बीज दर
4 से 6 किलोग्राम बीज प्रति हेक्टेयर पर्याप्त होता है।
बीज उपचार
बीज को ट्राइकोडर्मा एवं जैव उर्वरकों से उपचारित करने पर अंकुरण अच्छा होता है तथा प्रारम्भिक रोगों से सुरक्षा मिलती है।
संतुलित पोषण प्रबंधन
साडा वीर मल्टी माइक्रो न्यूट्रिएंट
ब्राउनटॉप मिलेट में जिंक, आयरन, बोरॉन, कॉपर एवं मैंगनीज की कमी को पूरा करने के लिए साडा वीर मल्टी माइक्रो न्यूट्रिएंट का उपयोग करें। इससे पौधों की हरियाली, प्रकाश संश्लेषण तथा दाना विकास बेहतर होता है।
4G साडा वीर (4G Sadaveer)
4G साडा वीर सीवीड एक्सट्रैक्ट, ऑर्गेनिक एसिड एवं प्राकृतिक वृद्धि हार्मोन से युक्त उत्पाद है। यह पौधों की वृद्धि, अधिक टिलर, मजबूत जड़ें तथा बालियों के विकास में सहायता करता है।
मात्रा: 2–4 मिली प्रति लीटर पानी।
- पहला स्प्रे: 20–25 दिन बाद।
- दूसरा स्प्रे: टिलर बनने पर।
- तीसरा स्प्रे: बालियां निकलने से पहले।
सिंचाई प्रबंधन
- बुवाई के बाद हल्की सिंचाई।
- टिलर बनने की अवस्था।
- बालियां निकलने पर।
- दाना भराव के समय।
अत्यधिक जलभराव से बचें।
खरपतवार नियंत्रण
बुवाई के 20-25 दिन बाद पहली निराई करें। आवश्यकता होने पर 40 दिन बाद दूसरी निराई करें।
फर्राटा (FARRATA 500 ML)
कीटनाशक, फफूंदनाशक अथवा घुलनशील उर्वरकों के साथ फर्राटा मिलाने से स्प्रे का फैलाव, चिपकाव एवं अवशोषण बेहतर होता है जिससे दवाओं की प्रभावशीलता बढ़ती है।
प्रमुख रोग
- पत्ती धब्बा रोग
- झुलसा रोग
- जड़ गलन
- फफूंदजनित रोग
फंगस फाइटर (Fungus Fighter)
फंगस फाइटर फफूंदजनित रोगों की रोकथाम तथा पौधों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक जैविक उत्पाद है।
मात्रा: 2 ग्राम प्रति लीटर पानी।
प्रमुख कीट
- तना छेदक
- एफिड
- लीफ हॉपर
- कटवर्म
कीटों की नियमित निगरानी करें। आवश्यकता होने पर अनुशंसित कीटनाशकों का प्रयोग करें तथा स्प्रे में फर्राटा मिलाएं।
बालियां एवं दाना विकास
बालियां निकलने से पहले 4G साडा वीर एवं साडा वीर स्प्रे का संयुक्त प्रयोग करने से पौधों की बढ़वार, बालियों का विकास एवं दाना भराव बेहतर होता है।
साडा वीर स्प्रे मात्रा: 1–2 ग्राम प्रति लीटर पानी।
अनुशंसित Sadaveer स्प्रे शेड्यूल
| फसल अवस्था | उत्पाद | उद्देश्य |
|---|---|---|
| बुवाई के समय | साडा वीर | जड़ विकास एवं पोषण |
| 20–25 दिन | 4G साडा वीर | बेहतर बढ़वार एवं टिलर |
| 35–40 दिन | मल्टी माइक्रो न्यूट्रिएंट | सूक्ष्म पोषक तत्वों की पूर्ति |
| बालियां निकलने से पहले | 4G + साडा वीर स्प्रे | बालियां एवं दाना विकास |
| रोग दिखाई देने पर | फंगस फाइटर | फफूंद नियंत्रण |
| सभी स्प्रे के साथ | फर्राटा | स्प्रे की प्रभावशीलता बढ़ाना |
कटाई
जब पौधों की बालियां सुनहरी हो जाएं तथा दाने कठोर हो जाएं तब फसल की कटाई करें। कटाई के बाद अच्छी तरह सुखाकर मड़ाई करें।
औसत उत्पादन
- 15–25 क्विंटल प्रति हेक्टेयर।
- उन्नत तकनीक एवं Sadaveer उत्पादों के उपयोग से 28–30 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।
आर्थिक लाभ
ब्राउनटॉप मिलेट की मांग स्वास्थ्य खाद्य पदार्थों, मिलेट आटा, मल्टीग्रेन उत्पादों एवं निर्यात बाजार में तेजी से बढ़ रही है। कम लागत, कम पानी और बेहतर बाजार मूल्य के कारण यह किसानों के लिए अत्यंत लाभदायक फसल बन रही है।
निष्कर्ष
ब्राउनटॉप मिलेट की खेती आधुनिक कृषि तकनीकों एवं संतुलित पोषण के साथ अत्यधिक लाभदायक सिद्ध हो सकती है। यदि किसान सही समय पर साडा वीर, 4G साडा वीर, साडा वीर मल्टी माइक्रो न्यूट्रिएंट, फर्राटा, फंगस फाइटर तथा साडा वीर स्प्रे का उपयोग करें, तो पौधों की बढ़वार, बालियों का विकास, दाना भराव तथा कुल उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि प्राप्त की जा सकती है।