राजगीरा/रामदाना की खेती

राजगीरा / रामदाना की खेती (Amaranth Farming) – उन्नत तकनीक, संतुलित पोषण एवं अधिक उत्पादन

राजगीरा (रामदाना/Amaranth) भारत की एक महत्वपूर्ण पोषक एवं नकदी फसल है। इसे सुपर फूड (Super Food) भी कहा जाता है क्योंकि इसके दानों में प्रोटीन, कैल्शियम, आयरन, मैग्नीशियम, फाइबर तथा आवश्यक अमीनो एसिड भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। भारत में इसकी खेती उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र तथा बिहार सहित अनेक राज्यों में की जाती है।

आजकल स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता के कारण राजगीरा की मांग तेजी से बढ़ रही है। यदि किसान उन्नत किस्मों का चयन, संतुलित पोषण तथा आधुनिक कृषि तकनीकों के साथ Sadaveer के जैविक उत्पादों का उपयोग करें तो अधिक उत्पादन एवं बेहतर गुणवत्ता प्राप्त की जा सकती है।

राजगीरा की खेती का महत्व

  • कम लागत में अधिक लाभ।
  • कम अवधि में तैयार होने वाली फसल।
  • सूखा सहन करने की क्षमता।
  • कम पानी में सफल खेती।
  • उच्च बाजार मूल्य।
  • जैविक खेती के लिए उपयुक्त।

उपयुक्त जलवायु

राजगीरा गर्म एवं मध्यम जलवायु की फसल है। 20°C से 32°C तापमान इसके लिए सर्वोत्तम रहता है। अधिक जलभराव तथा लगातार वर्षा फसल के लिए हानिकारक होती है।

उपयुक्त भूमि

अच्छी जल निकासी वाली दोमट या बलुई दोमट भूमि सर्वोत्तम रहती है। भूमि का pH 6.0 से 7.5 होना चाहिए।

खेत की तैयारी

2–3 गहरी जुताई करके खेत को भुरभुरा बनाएं। अंतिम जुताई में गोबर की अच्छी तरह सड़ी हुई खाद मिलाएं।

साडा वीर (Sada Veer)

खेत की तैयारी के समय या प्रारम्भिक वृद्धि अवस्था में साडा वीर का उपयोग करने से जड़ों का विकास, मिट्टी में पोषक तत्वों की उपलब्धता तथा पौधों की प्रारम्भिक वृद्धि बेहतर होती है। यह कार्बनिक अम्लों पर आधारित उत्पाद है जो पौधों की समग्र वृद्धि में सहायता करता है।

उन्नत किस्में

  • PRA-1
  • PRA-2
  • CO-1
  • Annapurna
  • Suvarna

बुवाई का समय

  • खरीफ : जून – जुलाई
  • रबी (कुछ क्षेत्रों में) : अक्टूबर – नवंबर

बीज दर

1 से 2 किलोग्राम बीज प्रति हेक्टेयर पर्याप्त होता है।

बीज उपचार

बीज को ट्राइकोडर्मा एवं जैव उर्वरकों से उपचारित करने पर अंकुरण अच्छा होता है तथा प्रारम्भिक रोगों से सुरक्षा मिलती है।

संतुलित पोषण प्रबंधन

साडा वीर मल्टी माइक्रो न्यूट्रिएंट

राजगीरा में जिंक, आयरन, बोरॉन, मैंगनीज एवं कॉपर जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी होने पर पौधों की वृद्धि प्रभावित होती है। साडा वीर मल्टी माइक्रो न्यूट्रिएंट इन आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्वों की पूर्ति कर पौधों की हरियाली, प्रकाश संश्लेषण तथा दाना विकास में सहायता करता है। :contentReference[oaicite:0]{index=0}

4G साडा वीर (4G Sadaveer)

4G साडा वीर सीवीड एक्सट्रैक्ट एवं ऑर्गेनिक एसिड आधारित उन्नत उत्पाद है जिसमें प्राकृतिक वृद्धि हार्मोन एवं सूक्ष्म खनिज पाए जाते हैं। यह पौधों की वृद्धि, शाखाओं, फूलों तथा दानों के विकास में सहायक है। :contentReference[oaicite:1]{index=1}

मात्रा : 2–4 मिली प्रति लीटर पानी।

  • पहला स्प्रे : 25–30 दिन बाद।
  • दूसरा स्प्रे : फूल आने से पहले।
  • तीसरा स्प्रे : दाना बनने की अवस्था में।

सिंचाई

  • बुवाई के तुरंत बाद हल्की सिंचाई।
  • फूल आने पर।
  • दाना बनने पर।
  • जलभराव बिल्कुल न होने दें।

खरपतवार नियंत्रण

20–25 दिन बाद पहली निराई तथा 40 दिन बाद दूसरी निराई करें।

फर्राटा (FARRATA)

यदि घुलनशील उर्वरक, कीटनाशक या फफूंदनाशक का स्प्रे किया जा रहा हो तो फर्राटा मिलाने से घोल का फैलाव, चिपकाव तथा अवशोषण बेहतर होता है। यह स्प्रे की प्रभावशीलता बढ़ाने में सहायक है। :contentReference[oaicite:2]{index=2}

प्रमुख रोग

  • पत्ती धब्बा रोग
  • डाउनी मिल्ड्यू
  • जड़ गलन
  • फफूंदजनित रोग

फंगस फाइटर (Fungus Fighter)

फंगस फाइटर फसल की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने तथा फफूंदजनित रोगों से सुरक्षा प्रदान करने वाला जैविक उत्पाद है। :contentReference[oaicite:3]{index=3}

मात्रा : 2 ग्राम प्रति लीटर पानी।

प्रमुख कीट

  • एफिड
  • लीफ हॉपर
  • इल्ली

कीट दिखाई देने पर अनुशंसित कीटनाशकों का प्रयोग करें। स्प्रे में फर्राटा मिलाने से बेहतर परिणाम प्राप्त हो सकते हैं।

फूल एवं दाना विकास

फूल आने की अवस्था में 4G साडा वीर तथा साडा वीर स्प्रे का संयुक्त उपयोग पौधों की बढ़वार, फूलों की संख्या तथा दाना भराव में सहायक हो सकता है।

साडा वीर स्प्रे मात्रा : 1–2 ग्राम प्रति लीटर पानी। :contentReference[oaicite:4]{index=4}

अनुशंसित Sadaveer स्प्रे शेड्यूल

फसल अवस्थाउत्पादउद्देश्य
बुवाई के समयसाडा वीरजड़ विकास एवं पोषण
25 दिन4G साडा वीरतेज बढ़वार
35 दिनमल्टी माइक्रो न्यूट्रिएंटसूक्ष्म पोषक तत्व
फूल आने पर4G + साडा वीर स्प्रेअधिक फूल एवं दाना विकास
रोग की शुरुआतफंगस फाइटरफफूंद नियंत्रण
सभी स्प्रे के साथफर्राटास्प्रे की प्रभावशीलता बढ़ाना

कटाई

जब पौधों की बालियां सुनहरी अथवा भूरी हो जाएं तथा दाने कठोर हो जाएं तब कटाई करें। कटाई के बाद फसल को सुखाकर मड़ाई करें।

औसत उत्पादन

  • 12–18 क्विंटल प्रति हेक्टेयर
  • उन्नत तकनीक एवं Sadaveer उत्पादों के उपयोग से 20–25 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।

निष्कर्ष

राजगीरा/रामदाना की खेती किसानों के लिए तेजी से लाभ देने वाली फसल बन रही है। यदि किसान उन्नत कृषि तकनीकों के साथ साडा वीर, 4G साडा वीर, साडा वीर मल्टी माइक्रो न्यूट्रिएंट, फर्राटा, फंगस फाइटर तथा साडा वीर स्प्रे का सही समय पर उपयोग करें, तो पौधों की वृद्धि, फूल, दाना भराव एवं उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि प्राप्त की जा सकती है।