मंडुआ की खेती

मंडुआ की खेती (Finger Millet / Ragi Farming) – उन्नत तकनीक, संतुलित पोषण एवं अधिक उत्पादन

मंडुआ (रागी/Finger Millet) भारत के प्रमुख श्री अन्न (Millets) में से एक है। यह अत्यधिक पौष्टिक अनाज है, जिसमें कैल्शियम, आयरन, फाइबर, प्रोटीन एवं खनिज तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। भारत में इसकी खेती मुख्य रूप से उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा, कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र तथा मध्य प्रदेश में की जाती है।

मंडुआ कम पानी, कम लागत तथा कम उपजाऊ भूमि में भी सफलतापूर्वक उगाया जा सकता है। बदलती जलवायु परिस्थितियों में यह किसानों के लिए सुरक्षित एवं लाभदायक फसल बनकर उभरा है। यदि संतुलित पोषण, उचित सिंचाई तथा आधुनिक कृषि तकनीकों के साथ Sadaveer के जैविक उत्पादों का उपयोग किया जाए तो उत्पादन एवं गुणवत्ता दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि प्राप्त की जा सकती है।

मंडुआ की खेती का महत्व

  • कम पानी में सफल खेती।
  • सूखा सहन करने की क्षमता।
  • कम लागत एवं अधिक लाभ।
  • पौष्टिक श्री अन्न (Nutri-Cereal)।
  • कम उपजाऊ भूमि में भी अच्छी पैदावार।
  • जैविक खेती के लिए उपयुक्त।

उपयुक्त जलवायु

मंडुआ गर्म एवं मध्यम वर्षा वाले क्षेत्रों की फसल है। 20°C से 30°C तापमान इसके लिए सर्वोत्तम रहता है। अधिक जलभराव फसल के लिए हानिकारक होता है।

उपयुक्त भूमि

दोमट, बलुई दोमट एवं हल्की लाल मिट्टी इसकी खेती के लिए सर्वोत्तम रहती है। भूमि का pH 5.5 से 7.5 होना चाहिए तथा जल निकासी अच्छी होनी चाहिए।

खेत की तैयारी

खेत की 2-3 गहरी जुताई कर मिट्टी को भुरभुरा बनाएं। अंतिम जुताई के समय 8-10 टन अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद या कम्पोस्ट प्रति हेक्टेयर मिलाएं।

साडा वीर (Sada Veer)

बुवाई के समय या प्रारम्भिक अवस्था में साडा वीर का प्रयोग जड़ों के विकास, पोषक तत्वों की उपलब्धता तथा पौधों की प्रारम्भिक बढ़वार में सहायक होता है। यह कार्बनिक अम्ल आधारित उत्पाद मिट्टी की सक्रियता बढ़ाकर पौधों को मजबूत बनाता है।

उन्नत किस्में

  • GPU-28
  • GPU-67
  • VL-149
  • PR-202
  • CO-15
  • HR-911

बुवाई का समय

  • खरीफ : जून से जुलाई
  • पर्वतीय क्षेत्र : मई से जून

बीज दर

8 से 10 किलोग्राम बीज प्रति हेक्टेयर पर्याप्त होता है।

बीज उपचार

बुवाई से पहले बीज को ट्राइकोडर्मा तथा जैव उर्वरकों से उपचारित करने पर अंकुरण अच्छा होता है एवं प्रारम्भिक रोगों से सुरक्षा मिलती है।

संतुलित पोषण प्रबंधन

साडा वीर मल्टी माइक्रो न्यूट्रिएंट

मंडुआ में जिंक, आयरन, बोरॉन, मैंगनीज एवं कॉपर जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी होने पर पौधों की वृद्धि रुक जाती है। साडा वीर मल्टी माइक्रो न्यूट्रिएंट फसल को आवश्यक सूक्ष्म पोषण प्रदान कर हरियाली, प्रकाश संश्लेषण एवं दाना विकास में सहायता करता है।

4G साडा वीर (4G Sadaveer)

4G साडा वीर सीवीड एक्सट्रैक्ट, ऑर्गेनिक एसिड, प्राकृतिक वृद्धि हार्मोन एवं सूक्ष्म खनिजों से युक्त उन्नत उत्पाद है। यह पौधों की बढ़वार, अधिक टिलर, मजबूत जड़ें तथा बालियों के विकास में सहायता करता है।

मात्रा : 2 से 4 मिली प्रति लीटर पानी।

  • पहला स्प्रे : 25 दिन बाद।
  • दूसरा स्प्रे : टिलर बनने पर।
  • तीसरा स्प्रे : बालियां निकलने से पहले।

सिंचाई प्रबंधन

  • बुवाई के बाद हल्की सिंचाई।
  • टिलर बनने की अवस्था।
  • बालियां निकलने पर।
  • दाना भरने की अवस्था।

जलभराव बिल्कुल नहीं होने दें।

खरपतवार नियंत्रण

20-25 दिन बाद पहली निराई तथा 40 दिन बाद दूसरी निराई करें।

फर्राटा (FARRATA 500 ML)

यदि कीटनाशक, फफूंदनाशक अथवा घुलनशील उर्वरकों का स्प्रे किया जा रहा हो तो फर्राटा मिलाने से घोल का फैलाव, चिपकाव एवं अवशोषण बेहतर होता है।

प्रमुख रोग

  • ब्लास्ट रोग
  • पत्ती धब्बा रोग
  • झुलसा रोग
  • जड़ गलन

फंगस फाइटर (Fungus Fighter)

फंगस फाइटर फफूंदजनित रोगों से सुरक्षा प्रदान करने तथा पौधों की प्राकृतिक प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाला जैविक उत्पाद है।

मात्रा : 2 ग्राम प्रति लीटर पानी।

प्रमुख कीट

  • तना छेदक
  • एफिड
  • लीफ हॉपर
  • कटवर्म

समय-समय पर खेत की निगरानी करें तथा आवश्यकता अनुसार अनुशंसित कीटनाशकों का प्रयोग करें। स्प्रे में फर्राटा मिलाने से बेहतर परिणाम प्राप्त हो सकते हैं।

बालियां एवं दाना विकास

बालियां निकलने से पहले 4G साडा वीर तथा साडा वीर स्प्रे का संयुक्त उपयोग पौधों की बढ़वार, बालियों की लंबाई तथा दाना भराव में सहायता करता है।

साडा वीर स्प्रे मात्रा : 1 से 2 ग्राम प्रति लीटर पानी।

अनुशंसित Sadaveer स्प्रे शेड्यूल

फसल अवस्थाउत्पादउद्देश्य
बुवाई के समयसाडा वीरजड़ विकास एवं पोषण
25 दिन4G साडा वीरबेहतर बढ़वार एवं टिलर
35-40 दिनमल्टी माइक्रो न्यूट्रिएंटसूक्ष्म पोषक तत्वों की पूर्ति
बालियां निकलने से पहले4G + साडा वीर स्प्रेअधिक बालियां एवं दाना विकास
रोग दिखाई देने परफंगस फाइटरफफूंद नियंत्रण
सभी स्प्रे के साथफर्राटास्प्रे की प्रभावशीलता बढ़ाना

कटाई

जब बालियां पूरी तरह पक जाएं तथा दाने कठोर हो जाएं तब फसल की कटाई करें। कटाई के बाद 4-5 दिन धूप में सुखाकर मड़ाई करें।

औसत उत्पादन

  • 20-30 क्विंटल प्रति हेक्टेयर।
  • उन्नत तकनीक एवं Sadaveer उत्पादों के उपयोग से 35 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।

आर्थिक लाभ

मंडुआ की बढ़ती मांग, पोषण मूल्य एवं सरकारी प्रोत्साहन के कारण इसकी खेती किसानों के लिए अत्यंत लाभदायक सिद्ध हो रही है। कम लागत, कम सिंचाई तथा बेहतर बाजार मूल्य के कारण यह श्री अन्न फसलों में प्रमुख स्थान रखती है।

निष्कर्ष

मंडुआ (रागी) की खेती आधुनिक कृषि तकनीकों एवं संतुलित पोषण के साथ अत्यधिक लाभदायक बन सकती है। यदि किसान सही समय पर साडा वीर, 4G साडा वीर, साडा वीर मल्टी माइक्रो न्यूट्रिएंट, फर्राटा, फंगस फाइटर तथा साडा वीर स्प्रे का उपयोग करें, तो पौधों की बढ़वार, बालियों का विकास, दाना भराव तथा कुल उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि प्राप्त की जा सकती है।